पक्षी दिवस मनाने का उद्देश्य विलुप्त हो रहे पक्षियों का संरक्षण

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गिरिडीह : 24 मार्च से 12 नवंबर आ गया। हमारे देश में कोरोना महामारी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है और दिन प्रति दिन नए मामले सामने आ रहे हैं। कोरोना मरीजों की मृत्यु की खबरें जहाँ एक ओर हमारा मनोबल को तोड़ने का निरंतर प्रयास कर रही है तो दूसरी ओर मरीजों का कोरोना से अनवरत जंग लड़ते हुए विजयी बन कर घर वापस आना हमारे हौंसला को बनाए रखने में अपना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और हम हर नयी सुबह नयी आशा के साथ क्रमशः आगे बढ़ रहे हैं। इस विकट परिस्थिति में फूल और कलियां हमें हंसना सिखला रही है तो भौंरें हमें गुनगुनाना सीखा रहे हैं।पेड़ की डालियां हमें विनम्रता सिखला रही हैं तो सूरज की किरणें हमें जगना और जगाना सीखा रहीं हैं।इन्हीं के बीच पक्षियां हमें अपने हौंसले बुलंद करना सिखला रही हैं।पक्षी द्वारा तिनका-तिनका जोड़कर बना बनाया घोंसला जब हवा के एक तेज झोकें से टूटकर बिखर जाता है तो वे विचलित नहीं होती या उनका मनोबल नहीं टूटता बल्कि वे फिर से तिनका-तिनका जोड़कर अपने नए घोसलें बना लेते हैं।इनके हौसलें को देखकर हम भी हौसलों के साथ निरंतर आगे बढ़ने का संकल्प लेते हैं।आज का विशेष दिन अर्थात 12 नवम्बर भी पक्षी विशेष है क्योंकि आज का दिन “राष्ट्रीय पक्षी दिवस” के रूप में मनाया जाता है क्योंकि आज के दिन विश्व-विख्यात पक्षी विशेषज्ञ सलीम अली का जन्म हुआ था।इन्होनें पक्षियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए सदा तत्पर होकर कार्य किए। नियमित पक्षियों के संग बातें करना,इनके भाव-भंगिमा को समझना सलीम अली के दैनिक जीवन का अंश था।पक्षियों पर आधारित पुस्तकें लिखकर इन्होनें प्रसिद्धि पाई और सरकार द्वारा पद्मभूषण और पद्मविभूषण से सम्मानित भी हुए।इनकी लिखी “बर्ड्स ऑफ इंडिया”नामक पुस्तक काफी लोकप्रिय हुई।”पक्षी दिवस” मनाने का मुख्य उद्देश्य विलुप्त हो रहे पक्षियों का संरक्षण करना है क्योंकि पक्षियां प्रकृति की अनमोल देन है। पक्षियों की चहचहाहट हमारे मन को खुशियाँ प्रदान करती है । तो आइए,आज के इस विशेष दिन में हम भी पक्षियों के संरक्षण व संवर्धन का संकल्प लें और इस दिशा में तत्पर होकर कार्य करें।

पक्षी दिवस विशेष में,ममता करे गुहार।रहे सुरक्षित पक्षियां, खिला रहे संसार।

डॉ. ममता बनर्जी “मंजरी”
साहित्यकार
गिरिडीह ( झारखण्ड )

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