बीस वर्षीय झारखण्ड

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गिरिडीह : झारखंड बीस साल का हो गया। 15 नवम्बर 2000 को भारतवर्ष गणराज्य का 28 वाँ राज्य के रूप में झारखण्ड राज्य की स्थापना हुई।पहले यह दक्षिणी बिहार के रूप में बिहार राज्य का हिस्सा था।इस राज्य का क्षेत्रफल 79.714 वर्ग किलोमीटर है तथा इसके पूरब में पश्चिम बंगाल,पश्चिम में उत्तरप्रदेश और छत्तीसगढ़,दक्षिण में उड़ीसा और उत्तर में बिहार राज्य अवस्थित है।जनगणना 2011 के अनुसार झारखण्ड की कुल जनसंख्या 3,29,88,134 हैं जो कि सम्पूर्ण भारत 2.72 % हैं।झारखण्ड की राजधानी राँची है।इस राज्य की सबसे बड़ी भौगोलिक विशेषता यह है कि यह पठारों और वनों से भरा है और खनिजों से परिपूर्ण है।कोयला,लौह अयस्क,ताम्बा,अभ्रक, कामनाइड,यूरेनियम,ग्रेफाइट,बैकसाइड,चीनी मिट्टी,चूना पत्थर,जस्ता के बहुतायत तो यहाँ है ही इसके अलावे सोना,क्रोमाइट,एलम, मैंगनीज,नोम्बा,चांपी और फायरक्ले भी झारखण्ड के गर्भ में समाहित है।साल,शीशम,केंद,सागौन,गमहार,महुआ,पलाश,सेमर,आँवला, आम,जामुन,पियार, खैर,करंज,कटहल जैसे छोटे-बड़े वृक्ष यहाँ प्रचुर मात्रा में हैं।यहाँ की प्रमुख नदियाँ स्वर्णरेखा,दामोदर,बराकर, अजय,उत्तरी कोयल,दक्षिणी कोयल,मयूराक्षी,कोनार,करकरी और काँची है।आदिम जन जातियाँ और जनजातियों से सुसज्जित झारखण्ड राज्य का गौरवमयी इतिहास है।यहाँ कई जनजातीय विद्रोह हुए,यथा-सरदार विद्रोह,तमाड़ विद्रोह,चेरो विद्रोह ,चुआड़ विद्रोह,कोल विद्रोह,पहाड़िया विद्रोह,मुण्डा विद्रोह,खरवार विद्रोह,संथाल विद्रोह आदि।इन विद्रोहों में झारखण्ड के भूमिपुत्रों ने अपने क्षेत्र के स्वतंत्र चेतना का परचम लहराने हेतु अंग्रेजों के विरुद्ध सीना तानकर खड़े हुए और यही है अंग्रेजों के विरुद्ध उनकी प्रारंभिक आंदोलन की शुरूआत हुई। आंदोलन के प्रमुख महानायकों के नाम यथा बुधु भगत,दिवा-किसुन,सिद्धू-कान्हू,ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव,पाण्डेय गणपत राय, टिकैत उमराव सिंह, शेख भिखारी, नीलाम्बर-पीताम्बर,तेलंगा खड़िया, तिलका मांझी, बिरसा मुण्डा, गया मुण्डा, जतरा भगत,राम नारायण सिंह,कार्तिक उराँव,जयपाल सिंह,सुशील कुमार बागे आदि के नाम आज भी स्वर्णाक्षरों में अंकित है।झारखण्ड आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभानेवाले तीन प्रमुख महानायक विनोद बिहारी महतो,ए. के राय, शिबू सोरेन के साथ-साथ शक्तिनाथ महतो,निर्मल महतो,एन ई होरो,अन्थोनी मुर्मू ,डॉ.रामदयाल मुण्डा,डॉ.अमर कुमार सिंह,बी.पी.केसरी,सूर्य सिंह बेसरा,लाल हेम्ब्रम और परमवीर चक्र से अलंकृत महान वीर अल्बर्ट एक्का झारखण्ड के गौरवमयी इतिहास के महानायक हैं।झारखण्ड आंदोलन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इस आंदोलन में आदिवासियों के साथ अन्य जाति,समुदाय और धर्मावलम्बियों ने भी जोर-शोर से अपनी भागीदारी निभाई।झारखण्ड के प्रसिद्ध व्यक्तित्व करिया मुण्डा,भीष्म नारायण सिंह,सूरज मंडल,बाबूलाल मरांडी को भला कौन नहीं जानता ?जमशेद जी टाटा और महेंद्र सिंह धोनी सदृश विभूतियाँ आज विश्व पटल में दैदीप्यमान सूर्य की भाँति प्रज्वलित हैं।झारखण्ड की प्राकृतिक सौंदर्यता अनुपम है।यहाँ के ऐतिहासिक, धार्मिक और दर्शनीय स्थलों में सालोंभर पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है।राँची का हुंडरू,पंचघाघ,जोन्हा और दशम जलप्रपात,जनजाति शोध संस्थान एवं संग्रहालय,बिरसा जैविक उद्यान,चुटुपाल घाटी स्थित शहीद स्थल,पहाड़ी मंदिर, कांके डैम,हटिया डैम,देवड़ी मंदिर आदि,नेतरहाट का घाघरी, लोथ,सदनी, वेनुसागर,हिरनी जलप्रपात आदि,देवघर के वैद्यनाथ धाम,तपोवन,त्रिकुटी पहाड़,आनंद पर्वत आदि,दुमका के वासुकीनाथ और मसानजोर,गिरिडीह के पारसनाथ धाम,उसरी जलप्रपात व खंडोली डैम,हजारीबाग राष्ट्रीय अभयारण्य,पलामू राष्ट्रीय उद्यान व अभयारण्य,बोकारो जिला स्थित चिड़िया घर, तेनुघाट डैम,पश्चिमी सिंहभूम आश्रयणी,साहबगंज स्थित उड़वा झील पक्षी आश्रयणी व राजमहल फोसिल्स अभयारण्य,धनबाद जिला स्थित तोपचांची झील,बिरसा मृग विहार,कालामाटी जैसी प्राकृतिक सुषमा देश-विदेश के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है।औद्योगिक केंद्रों में टाटा व बोकारो इस्पात कारखाना,माइनिंग एंड एलाइड इंजीनियरिंग कारपोरेशन लिमिटेड राँची,एच. ई.सी.हटिया,हिंदुस्तान कॉपर कारपोरेशन लिमटेड घाटशिला,हिंदुस्तान जिंक लिमिटिड धनबाद,नेशनल मिल्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन किरीबुरू,पाइरेक्स फोस्फेट्स एंड केमिकल मूरी,यूरेनियम प्रोसेसिंग,घाटशिला,माइका सिंडिकेट लिमिटिड,हजारीबाग,सुपर फास्फेट फेक्ट्री,धनबाद,इलेक्ट्रिक इक्विपमेंट फेक्ट्री,राँची आदि जैसे औद्योगिक केंद्र विश्वपटल पर अधिपत्य कायम करती है।विविध परियोजनाएँ,जल विद्युत केंद्र,शोध संस्थान इस राज्य की पहचान है तो विविध शिक्षण संस्थान,विश्वविद्यालय और मेडिकल कॉलेज झारखण्ड की गरिमा में चार चाँद लगाती है।झारखण्ड की प्रमुख भाषाएँ खोरठा,नागपुरी,पंचपरगनिया,कुरमाली,मुण्डारी,संताली,हो,खड़िया और कुड़ुख है।कृषि के क्षेत्र में भी झारखण्ड अग्रगण्य है।यहाँ की मिट्टी में धान,गेहूँ,मकई,जवार, बाजरा,गुंदली,अरहर,उरद,मटर,कुरथी,मूँग, मसूर,खेसारी और मूँगफली,आलू,प्याज,हरी सब्जियाँ आदि प्रचुर मात्रा में उगाए जाते हैं।अब अगर संस्कृति की बात की जाए तो झारखण्ड में आदिवासियों और सदानों की साझी संस्कृति रही है।सरहुल,फगुआ,मंडा, करमा,धानबुनी,आषाढ़ी पूजा,नवाखानी,सोहराय,सूर्याही पूजा,जनी शिकार,टुसु पर्व आदि त्योहारों में कई त्योहार यहाँ के जनजातियों द्वारा मनाएँ जाते हैं।बाकी झारखण्ड के अन्य समुदायों के साथ जनजातियाँ भी बड़े प्रेम और सौहार्द के साथ मनाते हैं।इतना सब होने के बावजूद भी जनजातियों में कई समस्याएँ आज भी वर्तमान हैं।जैसे- जनजातीय भूमि हस्तांतरण की समस्या,जनजातीय शिक्षा व स्वास्थ्य की समस्या,जनजातीय बेरोजगार की समस्या,जनजातीय मद्यपान की समस्या,जनजातियों में वनदोहन, विस्थापन और पुर्नवास ,धर्मान्तरण और डायन प्रथा की समस्या।इन समस्याओं के निवारण के लिए सरकार द्वारा कई कल्याण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।पिछले वर्षों झारखण्ड में कई अन्य समस्याओं के साथ उग्रवाद की समस्या भी एक प्रमुख समस्या के रूप में आई जिसके निवारण के लिए भी सरकार का प्रयास सराहनीय रहा। विविध समस्याओं के बीच राज्य प्रगति की ओर अग्रसर है लेकिन समग्र विकास के लिए यह राज्य अबतक बाट जोह रहा है।आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि आनेवाले वर्षों में झारखण्ड राज्य को सारी समस्याओं से मुक्ति मिल जाएगी और हमारा राज्य झारखण्ड सुखी ,सम्पन्न और समृद्धशाली राज्य के रूप में विश्वपटल पर छाया रहेगा।

-डॉ. ममता बनर्जी “मंजरी”
गिरिडीह ( झारखण्ड )

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