मंदिरों में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र व बहन सुभद्रा की विशेष पूजा

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गिरिडीह: कोरोना के कारण इस बार गिरिडीह में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा नहीं निकली। आषाढ़ शुक्ल द्वितीया पर मंगलवार को शहर के दर्जी मोहल्ला स्थित पुरातन शिवालय, गगन मुखर्जी रोड स्थित त्रिमूर्ति मंदिर, आश्रम रोड मोड़ स्थित दुर्गा माता मंदिर समेत अन्य मंदिरों में पूजा पाठ का आयोजन हुआ। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के विग्रह की पूजा पुरोहितों द्वारा की गई।
वहीं गिरिडीह के पुरातन शिवालय में रथ यात्रा की बजाय भगवान जगन्नाथ, बलभद्र व सुभद्रा को पालकी पर बिठाकर मंदिर में ही फेरे लगाए गए व परंपरा का निर्वहन किया गया। मंदिर के पुजारी सतीश मिश्रा ने बताया कि वैश्विक महामारी कोरोना के कारण भगवान जगन्नाथ का पूजन मंदिर में ही पूरे विधि-विधान के साथ किया गया। मंत्रोच्चारण के साथ नेत्रदान, स्नान-ध्यान के उपरांत दिव्य श्रृंगार किया गया। तत्पश्चात भगवान को भोग अर्पित किया गया एवं आरती की गई। कहा कि भगवान जगन्नाथ संसार का कल्याण करने के लिए पन्द्रह दिनों के अज्ञातवास के पश्चात आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को भक्तों को दर्शन देने बाहर आते हैं। भक्तगण भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का दर्शन करते हैं। जो शारीरिक एवं सांसारिक दुखों का नाश करने वाला होता है। भगवान जगन्नाथ आठ दिनों तक मौसी बाड़ी में विश्राम करने के पश्चात वापस मंदिर में आ जाते हैं।

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