निकलता गया कोयला, मालामाल होते गए अफसर, ठेकेदार, यही है गिरिडीह कोलियरी की दास्तान ए और बर्बादी

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गिरिडीह जिले का एकमात्र सरकारी उपक्रम सीसीएल गिरिडीह कोलियरी लगभग 160 करोड़ रुपये के घाटे पर चल रही है। गिरिडीह कोलियरी को पुनः एरिया का दर्जा मिलने के बाद विकास को ले उम्मीद की नई किरण जगी थी लेकिन वर्तमान में जो परिस्थिति है उसमें गिरिडीह कोलियरी को घाटे से उबारने के साथ-साथ कोयला उत्पादन में बढ़ोतरी प्रबंधन के लिए चुनौती बनी हुई है। लगभग 45 सौ एकड़ भूमि में फैली गिरिडीह कोलियरी ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक इस कोलियरी में लगभग 10 मिलियन टन उच्च गुणवत्ता वाले कोयले का भंडार है। बता दें कि इस कोलियरी को दो दशक पहले प्रोजेक्ट से एरिया का दर्जा मिला था। बाद के दिनों में प्रोजेक्ट बनने के बाद 11 अक्टूबर 2018 को सीसीएल मुख्यालय ने फिर से गिरिडीह कोलियरी को एरिया का स्वरूप प्रदान किया है। इस कोलियरी के अंतर्गत कबरीबाद माइंस एवं ओपनकास्ट परियोजना है। इन दोनों माइंस से कोयला का उत्पादन हो रहा था। लेकिन फरवरी 2018 से सीटीओ ( कन्सर्न टू ओपरेट) के अभाव में कबरीबाद माइंस में कोयला का उत्पादन बंद है। ओपनकास्ट परियोजना में सीसीएल खुद से व आउटसोर्सिंग के जरिये उत्पादन किया। किंतु आउटसोर्सिंग से बेहतर तरीके से कोयला का उत्पादन नहीं हो पाया। इसके अलावा वर्कशॉप की भी स्थिति खस्ता होती जा रही है। ऐसे में एरिया बनने के बाद सीसीएल गिरिडीह के कामगारों व असंगठित मजदूरों में जो आशा की किरण जगी थी उसकी सार्थकता नजर नहीं आ रही है। बता दें कि गिरिडीह कोलियरी में मेन पावर की संख्या लगभग 750 व अधिकारियों की संख्या लगभग 45 के आसपास है।

कबरीबाद माइंस को अब तक नहीं मिला सीटीओ

कबरीबाद माइंस को अब तक सीटीओ नहीं मिला पाया है। सीटीओ की तमाम कोशिशों का दावा करने के बाद भी कबरीबाद माइंस को अब तक सीटीओ नहीं मिल पाया है। सीटीओ के अभाव में कबरीबाद माइंस में पिछले डेढ़ वर्षो से कोयला का उत्पादन बंद है। जानकारों की मानें तो कुछ वर्ष पूर्व लक्ष्य से अधिक कोयला का उत्पादन करने के कारण इस माइंस को वायलेंस पर डाला गया है। बताया जाता है कि इनवायरमेंट क्लीयरेंस देने के बाद ही झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा सीटीओ दिया जाएगा। इस बाबत सीसीएल प्रबंधन द्वारा प्रयास करने की बात कही जा रही है लेकिन इसका कोई सार्थक नतीजा नहीं आया है। बता दें कि सीसीएल ट्रक ओनर्स एसोसिएशन द्वारा गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू के संज्ञान में इस मामले को लाते हुए उचित पहल की मांग की जा चुकी है। विधायक द्वारा भी इस मामले में पहल की गई परंतु परिणाम अब तक सिफर रहा है। सूत्रों के मुताबिक कबरीबाद माइंस में काफी कोयला है। यहां पर ओबी भी हटा कर रखा गया है। सिर्फ सीटीओ मिलने का इंतजार है। वर्तमान में कबरीबाद माइंड से सटे एक खदान में पानी भर जाने कारण उसकी निकासी के लिए दो बड़े बड़े समरसेबल पंप लगाए गए हैं ताकि सीटीओ मिलने की स्थिति में उत्पादन कार्य के दौरान कोई समस्या उत्पन्न ना हो। इधर कोयला उत्पादन बंद रहने के कारण रोड सेल से जुड़े असंगठित मजदूरों के अलावे ट्रक ओनर, ड्राइवर खलासी व स्थानीय दुकानदारों को आर्थिक तंगी से जूझना पड़ रहा है।

लूट खसोट की नीति के कारण घाटे में इजाफा

गिरिडीह कोलियरी में लूट खसोट की नीति के कारण इसके घाटे में निरंतर इजाफा हुआ है। कभी नये माइंस खोलने के नाम पर तो कभी अनावश्यक रूप से ठेकेदारी कार्य के नाम पर लूटखसोट हावी रही है। वहीं उत्पादित कोयले की चोरी भी एक प्रमुख कारण है। जानकारों के मुताबिक वर्ष 1985-86 में गिरिडीह कोलियरी का घाटा लगभग 1.76 करोड़ था। वर्ष 1990-91 में या घाटा 8.32 करोड़ हुआ।वहीं वर्ष 2000 -01 में कोलियरी का घाटा 27.29 करोड़ था। वर्तमान में गिरिडीह कोलियरी लगभग160 करोड़ रुपए घाटे पर चल रही है ।घाटे की वजह से गिरिडीह को मिले एरिया का दर्जा छीन कर इसे बीएनके एरिया में शामिल किया गया था। लेकिन पुनः एक बार फिर दो माइंस वाले इस प्रक्षेत्र को एरिया का दर्जा दिया गया है।

वित्तीय वर्ष 2021-22 में 1 मिलियन टन कोयला उत्पादन की योजना

सीसीएल प्रबंधन ने वित्तीय वर्ष 2021 -22 में गिरिडीह एरिया से एक मिलियन टन कोयला उत्पादन करने की योजना तैयार की है। बताया जाता है कि बगैर आउटसोर्सिंग के इतना कोयला का उत्पादन करना संभव नहीं है। लिहाजा ओपन कास्ट परियोजना में आउटसोर्सिंग के माध्यम से उत्पादन लक्ष्य प्राप्त करने की रणनीति बनी है। इस संबंध में गिरिडीह कोलियरी के महाप्रबंधक एम के अग्रवाल बताते हैं कि वित्तीय वर्ष 2021 -22 में गिरिडीह कोलियरी से एक मिलियन टन कोयला उत्पादन करने की योजना है। इस पर अभी काम चल रहा है।जल्दी तमाम प्रक्रियाएं पूरी हो जाएगी।बताया कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में सीसीएल मुख्यालय द्वारा गिरिडीह कोलियरी को 1.40 लाख टन कोयला का उत्पादन लक्ष्य दिया गया है। इसके तहत ओपनकास्ट माइंस को यह लक्ष्य मिला है।अभी कबरीवाद माइंस को सीटीओ नहीं मिला है। लिहाजा उसका लक्ष्य शुन्य है। उन्होंने कहा कि दिए गए लक्ष्य से अधिक कोयला का उत्पादन किया जाएगा।जीएम ने बताया कि गिरिडीह कोलियरी अभी लगभग 160 करोड़ रुपये घाटे में चल रही है। इस घाटे को पाटने के लिए उत्पादन में बढ़ोतरी के साथ-साथ बिजली के अनावश्यक खर्च में कटौती व कोयला चोरी पर रोक लगाने का प्रयास किया जा रहा है। बता दें कि पिछले वित्तीय वर्ष में गिरिडीह कोलियरी ने 1 .28 लाख टन कोयला का उत्पादन किया था।

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